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जमीला बनी भारत की पहली महिला मुस्लिम डाकिया

जमीला बनी भारत की पहली महिला मुस्लिम डाकिया
Views:- Tuesday, March 13, 2018-6:34 PM

पहले जमाने में लोग चिट्ठियों को जरिए अपनों को संदेश भेजा करते थे और इसे अपनी सही जगह पर पहुंचाने का काम पोस्ट मैन यानि डाकिए के जरिए किया जाता था। आज जमाना चाहे कितना भी क्यों न बदल गया हो, चिट्ठियों का जगह अब एस एम एस ने ले ली है, व्हाट्स एप, फेसबुक के अलावा और भी बहुत सी सोशल साइट्स लोग घंटों चैटिंग करते रहते हैं लेकिन डाकिए की अहमियत आज भी बहुत है। सरकारी डाक विभाग की जिम्मेदारियां पहले की तरह ही बनी हुई है। हमारे देश में लगभग 37,160 लोग डाकिए की नौकरी कर रहे हैं। इनमें से 2708 लेडी पोस्ट मैन हैं लेकिन लेकिन अब तक उनमें एक भी महिला डाकिया मुस्लिम समुदाय से नहीं रही हैं। 
 


आंध्र प्रदेश की रहने वाली जमीला को देश की पहली मुस्लिम महिला पोस्टमैन होने का दर्जा मिला है। जमीला हैदराबाद के महबूबाबाद जिले के गरला मंडल की लेडी पोस्टमैन के रूप में नियुक्त हुई हैं। जमीला के पति की ख्वाजा मियां की कुछ साल पहले मौत हो गई थी। छोटे-छोटे बच्चों का पालने के लिए उन्हें बहुत मुश्किलों का सामना करना पड़ा। बाद में संजोग से उन्हें पति की जगह पर डाकिए की नौकरी मिल गई। इसके बाद जमीला पहली मुस्लिम महिला डाकिया बन गईं। 
 


अब जमीला अपने इलाके में घर-घर जाकर डाक सामग्री बांटती है। उनकी बड़ी बेटी इंजीनियरिंग तो छोटी बेटी डिप्लोमा की पढ़ाई कर रही है। जब उनके पिता की मौत हुई तब जमीला की बड़ी बेटी पांचवी क्लास में थी। इसके अलावा वह घर चलाने के लिए साड़ियां बेचती हैं और कुुछ पैसे कमा लेती हैं। इन नौकरी से उन्हें मात्रा छह हजार रुपए मिल पाते हैं। 

 


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